
कौन हो तुम ?
कहाँ से आते हो ?
कहाँ चले जाते हो ?
कब आते हो ?
कब चले जाते हो ,
पता ही नहीं चलता
पर हाँ ...
जब भी आते हो ...
जहन में सवाल छोड़ जाते हो ,
एक नाता सा जुड़ गया है तुमसे
कोई तो है ...
जो दिल के बहुत करीब है
बस इतना कहूँगी ...
मिलना एक बार फिर
ऐसे ही अंत से पहले |
5 टिप्पणियां:
वाह , बहुत सुंदर
यहाँ भी पधारे
गजल
http://shoryamalik.blogspot.in/2013/08/blog-post_4.html
बहुत सुंदर
अंत से पहले मिलने की यह प्रार्थना सच्ची लगती है।
बहुत अच्छी रचना !
शुक्रिया दोस्तों |
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