शनिवार, 8 जनवरी 2011

सब्र रखिये और ख़ुशी बाँटिये !


 एक बीज अपने भीतर सब्र का डालिए और उसे फलने - फूलने
का मौका  दीजिये | आप पाएंगे की आपकी आत्मा पहले से ज्यादा
पोषित हो गई है | क्युकी दुनियां रोज़ नई है , बस उसे पहचानने
के लिए सब्र रखिये और ख़ुशी बाँटिये |

6 टिप्‍पणियां:

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

bahut badiya

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

Sunder ....Sahi baat

Minakshi Pant ने कहा…

shukriya dost

शिक्षामित्र ने कहा…

भाग-दौड़ भरी इस ज़िंदगी में लोगों के पास बहुत कुछ है-सिवाए सब्र के। खुशी का क्या आलम है,वह भी दिख ही रहा है।

Rahul Singh ने कहा…

रोज नई होती दुनिया पर जिसकी नजर है, उससे अधिक ताजा और कुछ नहीं हो सकता.

Minakshi Pant ने कहा…

shukriya dosto